कंकाल तंत्र के जोड़ और सिनोवियल जोड़ कितने प्रकार के होते है?

कंकाल तंत्र के जोड़

हमारे कंकाल तंत्र की हड्डियां बेहद कठोर होती हैं जिससे शरीर को मजबूती मिल सके। लेकिन अगर कंकाल सिर्फ एक ही ठोस हड्डी से बना होता तो इसका हिलना डुलना असंभव हो जाता। प्रकृति ने हमारे कंकाल को कई हड्डियों में बांट कर इस समस्या का हल कर दिया है और जहां भी दो या ज्यादा हड्डियां मिलती हैं वहां जोड़ बना दिए हैं।

लेकिन मानव और जानवरों का कंकाल तंत्र और उनके बड़े भाग यह दोनों में कुछ अलग-अलग प्रकार से पाए जाते हैं और हमारा कंकाल तंत्र हमारे पूर्वजों से विकसित हुआ और उन्हीं के विकास में जोड़ का भी कुछ संबंध है।

चलो आज कुछ अपने शरीर के विशेष जोड़ों के बारे में जानते हैं।

कंकाल तंत्र के जोड़ - सिनोवियल जोड़ के प्रकार | Joint - Types Of Synovial Joint @Basic of science

जॉइंट कितने प्रकार के होते है।

सिनोवियल जॉइंट या जोड़ क्या है?

हड्डियों के बेजोड़ जो हिलते डुलते हैं उन्हें सिनोवियल जोड़ कहते है जैसे कि हमारे कंधे या हमारे घुटने में होते हैं।

दूसरी तरह के वो जोड़ होते हैं जो बिल्कुल भी नहीं हिलते-डुलते जैसे कि हमारी खोपड़ी (Skull) या छाती में होते हैं।

सिनोवियल जोड़ के आकार अलग अलग है लेकिन उनकी सबसे खास बात यह है कि वो हड्डियों को हिलने डुलने में मदद करते हैं जोड़ ये तय करते हैं कि हमारा शरीर किन किन स्थितियों में आ सकता है और उसे किस सीमा तक ही किया जा सकता है।

सिनोवियल जोड़ कितने प्रकार के होते है?

 यह सिनोवियल जोड़ के छह प्रकार हैं

1. हिन्ज

2. पिवट

3. बॉल और सॉकेट

4. एलिप्सोइड

5. सॅडल

6. प्लेन

चलो एक-एक करके इन्हें देखते हैं।

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Types of Synovial Joints in Hindi

1. हिन्ज

हिन्ज जोड़ एक बहुत ही सरल जोड़ होता है। इससे जुड़ी हड्डियां केवल एक दुरी पर हिल डुल सकती हैं। इससे जुड़ी दो हड्डियों में से एक का सर बेलन जैसा होता है और दूसरी हड्डी इस बेलन के इर्दगिर्द लिपटी हुई होती है जिससे ये हड्डिय आसानी  से घूम सकती हैं।

ये हड्डियां आपस में आसानी से जुड़ी है परन्तु इन का हर तरह  घूमना संभव नहीं है। लेकिन इस तरह से वो अच्छी तरह से घूम सकती हैं। ठीक एक दरवाजे के कब्जे की तरह जो दरवाजे को सिर्फ खुलने व बंद होने देता है और इस तरह के जोड़ का सबसे अच्छा उदाहरण है कोहनी अपनी कोहनी को एक दरवाजे की तरह मोड़ने की कोशिश करें।

इन जोड़ के कारण ही तुम इसे ऐसा मोड़ पाते हो तो कोहनी की हड्डियों के बीच का ये जोड़ अगर सिर्फ ऊपर और सीधा हिल सकता है तो फिर हम अपने हाथों के आगे के भाग को ऐसे कैसे मोड़ सकते हैं। 

चलो अगले जोड़ को देखते हैं और इसे समझने की कोशिश करते हैं।

2. पिवट

यह जोड़ भी हड्डियों को केवल एक ही धुरी पर घूमने देता है।

इससे जुड़ी हड्डियां खड़ी या लंबी धुरी पर घूम सकती हैं। पिवट जोड़ में भी एक बेलन जैसी हड्डी होती है जो एक दूसरी हड्डी या स्नायु के अंदर घूमती है और यह दूसरी हड्डी इस बेलन के चारों ओर एक छल्ले की तरह लिपटी रहती है।

पिवट जोड़ कहाँ पाया जाता है?

इसके उदाहरण से कोहनी के ठीक नीचे का जोड़ जिसे रेडियो क्लीनर कहते हैं और हमारी कलाई की हड्डियों के जोड़ इन दो जोड़ों के मेल से हम अपनी बाँह को कोहनी से ऐसे मोड़ पाते हैं।

चिमटे से रोटी पलटते समय ये पिवट जोड़ ही हमें बांह को इस तरह से मोड़ने देता है।

अगर तुम अपनी बांह को ऐसे मोड़कर तो देखो तुम समझ जाओगे के पीछे जोड़ किस तरह काम करता है।

3. बॉल और सॉकेट (Ball and socket joint)

बॉल और सॉकेट जोड़ सबसे मजेदार है। जैसा इसका नाम है, ठीक वैसा ही दिखता है। एक कटोरे या सॉकेट जैसी हड्डी के अंदर एक गेंद या बॉल जैसी हड्डी इस जोड़ का सरल और प्रभावी ढांचा इससे जुड़ी हड्डियों को सभी दिशाओं में आराम से घूमने देता है। आगे पीछे धुरी के इर्द-गिर्द और गोल-गोल बॉल 

बाॅल और सॉकेट जोड़ के उदहारण

बाॅल और सॉकेट जोड़ के दो उदहारण हैं। हमारे कंधे और कूल्हे पर मिलने वाले जोड़ कूल्हे के जोड़ कटोरी जैसी होती है वो काफी गहरी होती है जिसकी वजह से इस जोड़ को बहुत मजबूती मिलती है। लेकिन हां इससे उसके हिलने डुलने की क्षमता थोड़ी कम हो जाती है।

इसलिए कूल्हे की हड्डी से जुड़े अपने पैर को आप चकरी की तरह हर दिशा में नहीं घुमा सकते। पैरों के घूमने की एक सीमा होती है।

कंधे के जोड़ में कटोरी जैसी हड्डी बहुत गहरी नहीं होती। इसी वजह से यह हड्डियां बहुत आसानी से हिल डुल सकती हैं लेकिन इनकी मजबूती थोड़ी कम हो जाती है। इसलिए आप अपनी पूरी बांह को कंधे से हर दिशा में घुमाते सकते हैं लेकिन कंधे की हड्डियों का खिसक जाना भी बहुत ही आम बात होती है।

4. एलिप्सोइड

एलिप्सोइड जोड़ बॉल और सॉकेट जोड़ से बहुत मिलता जुलता है। दोनों में अंतर यह है कि एलिप्सोइड जोड़ गोल न होकर अंडाकार होता है और इसी कारण यह बॉल और सॉकेट के जितना घूम नहीं सकता।

जहां से हमारी हथेली शुरू होती है वहां की हड्डियां जिन्हें रेडियोकार्पल (Radiocapals) कहते हैं, वहां पर एलिप्सोइड जोड़ पाया जाता है।

इन हड्डियों का समूह और इनके बीच का एलिट कोई जोड़ तब हरकत में आता है जब आप किसी को अलविदा या बाय-बाय कहने के लिए हाथ हिलाते हैं। 

5. सॅडल

सॅडल जोड़ एलिपसॉयड से मिलते जुलते हैं लेकिन इससे जुड़ी हड्डियां एलिप्सोइड जोड़ से जुड़ी हड्डियों के मुकाबले और कम हिल पाती हैं।

इसका ढाँचा बड़ा रोचक होता है। दोनों ही हड्डियों में एक उत्तल यानी उभरी हुई और एक अवतल यानी धंसी हुई सतह होती है। एक हड्डी के उत्तल सतह दूसरी हड्डी की अवतल सतह पर फिट रहती है। 

सॅडल जोड़ के उदाहरण

शरीर में सॅडल जोड़ का उदाहरण अंगूठे का जोड़ होता है जिसे कारकों मेटाकार्पल कहते हैं।

अपने अंगूठे को ऐसे हिलाकर तुम जोड़ को काम करते देख सकते हो।

6. प्लेनं

प्लेन जोड़ प्लेन जोड़े बहुत ही सरल जोड़ होता है। जिसमें दो सपाट सतह एक दूसरे से जुड़ी होती हैं। यें दूसरे के ऊपर केवल सरक सकती है पर किसी भी तरह से हिल डुल नहीं सकती।

यह आम तौर पर हथेली की हड्डियों के बीच और पैर के पंजों की हड्डियों में पाया जाता है।

आपने अभी अभी अपने शरीर के छह अलग-अलग जोड़ों के बारे में सीखा। अब क्या तुम एक-एक करके इन सभी जोड़ों को अपने शरीर में ढूंढ सकते हो और तुम्हें क्या लगता है कि इन सारे जोड़ों में से सबसे काम का जोड़ कौनसा है।

ज़रा बताओ तो

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