शरीर मे एड्रीनलीन हार्मोन और इंसुलिन हार्मोन की भूमिका

तंत्रिका तंत्र और अंतः स्त्रावित तंत्र दो पृथक तंत्र हैं लेकिन वे शरीर के सुचारू रूप से कार्य करने हेतु मिलकर कार्य करते हैं।

अंतः स्त्रावित तंत्र बहुत सी ग्रंथियों का बना होता है, जो हर्मोन नामक रासायनिक संदेश वाहकों का श्रावण सीधे रक्त प्रवाह में करती है। हार्मोन शरीर में कुछ खास लक्षित कोशिकाओं या अंगों पर कार्य कर हमारे शरीर की अनुक्रिया को नियंत्रित करता है। उदाहरण के लिए एड्रीनलीन यकृत पर कार्य करता है।

एड्रीनलीन हार्मोन

हार्मोन का स्तर बाह्य और आंतरिक वातावरण में बदलाव द्वारा प्रेरित होता है। जब आप भयभीत या गुस्से में होते हैं या शारीरिक श्रम के कारण आपके रक्त का ग्लूकोज स्तर गिर जाता है तो रक्त में  एड्रीनलीन हार्मोन स्रावित होता है।एड्रीनलीन  शरीर को अति चौकन्ना रखता है।

एड्रीनलीन हार्मोन के कार्य

यह हार्मोन एड्रीनलीन हृदय की धड़कन को तथा पेशियों और मस्तिष्क में रक्त प्रवाह और ऑक्सीजन अंतः ग्रहण की क्षमता को बढ़ा देता है। इसके कारण मुलायम पेशियां सिकुड़ने और पुतलियां फैलने लगती हैं। शरीर भी पसीना छोड़ना शुरू कर देता है।

एड्रीनलीन यकृत में ग्लाइकोजन को ग्लूकोज में बदलने को उत्तेजित करता है जिससे आप लड़ने या दौड़ जाने के लिए ऊर्जा की विशाल मात्रा प्राप्त करते हैं।

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 इंसुलिन

जैसे की किसी को टाइप 1 मधुमेह है या मधुमेह मेलीटस है उसे पूरे दिन नियमित अंतरालों पर इंसुलिन की सुई लेने की आवश्यकता होती है। एक बार जब वह सुई लेना भूल गया वह बेहोश होकर गिर गया। क्या आप समझा सकते हैं कि ऐसा क्यों होता है।

पाचन तंत्र मे इन्सुलिन की भूमिका

पाचन के दौरान भोजन ग्लूकोस और दूसरे घटकों में टूटता है, जो फिर छोटी आंत द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है। कोशिकाओं के भीतर ग्लूकोस ऊर्जा मुक्त करने के लिए ओक्सीकृत होता है।

ग्लूकोज़ अणु एक कोशिका के भीतर केवल इंसुलिन हार्मोन की उपस्थिति में ही प्रवेश कर सकता है।

एक स्वस्थ व्यक्ति में अग्नाशय इंसुलिन स्त्रावित करता है, जो कोशिकीय कुंजी के रूप में कार्य करता है।

जब रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ता है ।

अग्नाशय इंसुलिन स्रावित करता है इंसुलिन कोशिकाओं द्वारा अतिरिक्त ग्लूकोज को ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए ले जाने की अनुमति देता है।

अतिरिक्त ग्लूकोज ग्लाइकोजन  में रूपांतरित होकर यकृत तथा पेशियाँ कोशिकाओं में जमा हो जाता है जब रक्त ग्लूकोज का स्तर गिरता है। इंसुलिन का स्त्राव भी गिर जाता है।

 टाइप वन मधुमेह वाला व्यक्ति इंसुलिन की पर्याप्त मात्रा उत्पन्न नहीं कर सकता है इसलिए रक्त में उपस्थित ग्लूकोज शरीर को ऊर्जा देने के लिए ओक्सीकृत नहीं हो सकता है। इसलिए इंसुलिन की सुई लेना भूलने पर टाइप वन मधुमेह वाला व्यक्ति बेहोश होकर गिर सकता है या कोमा में जा सकता है

इसीलिए उस व्यक्ति को पूरे दिन भर नियमित अंतरालों पर इंसुलिन की सुई लेती रहनी चाहिए।

प्रश्न.1 एड्रीनलीन हार्मोन क्या है

उत्तर . एड्रीनलीन हार्मोन को आपातकालीन हार्मोन के नाम से भी जाना जाता है, जब आप भयभीत और गुस्से में होते हो तब यह हार्मोन कार्य करता है। यह हार्मोन एड्रेनल ग्लैंड से स्रावित होता है ।

 प्रश्न.2 adrenal gland se konsa hormone strav hota hai

उत्तर. Adrenal gland se adrenalin hormone stravit hota ha.

प्रश्न.3 इंसुलिन इंजेक्शन 24 घंटे मे कितनी बार लेनी चाहिए?

उत्तर.  24 घंटे में  इंसुलिन इंजेक्शन डॉक्टर के बताये अनुसार नियमित अंतरालों पर इंसुलिन की इंजेक्शन लेती रहनी चाहिए।

प्रश्न.4 शरीर में इंसुलिन बन रहा है या नहीं कैसे पता चलता है?

उत्तर.  शरीर में इंसुलिन नहीं बनने के लिये कुछ लक्षण हँ ,खाना खाने के बाद भूख लगना, और हाथ व पैरो में दर्द होना ,और कम समय के अन्तराल में बार-बार पेशाब करने जाना। जिस व्यक्ति को डायबिटीज या मधुमेह होता है उसके इंसुलिन नहीं बनता हँ।

प्रश्न.5 sugar type 1 me konsi injection leni chahiye?

उत्तर.  sugar type 1 me insuline ka injection leni chahiye.

प्रश्न.6 टाइप 1 मधुमेह के उपचार 2020

उत्तर. टाइप 1 मधुमेह का यह उपचार है , की इन्सुलिन के इंजेक्शन नियमित अंतरालों में लेते रहना  चाहिए। इन्सुलिन पंप का उपयोग करते रहना चाहिए और डॉक्टर से सलाह लेते रहे।

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