कृत्रिम वर्षा कैसे करवाई जाती हैं?, बारिश करवाने के लिए बादलों में कोनसे रसायन छिडके जाते है और क्या कृत्रिम वर्षा धरती के लिए सुरक्षित है?

सुखा, जहां पर्याप्त वर्षा नहीं होती है और उन शहरों में जहां प्रदूषण काफी ज्यादा है उनके निवारण के लिए वैज्ञानिक कृत्रिम वर्षा का सहारा लेते हैं।

कृत्रिम वर्षा (Artificial Rain) क्या होती है?

कृत्रिम वर्षा एक ऐसी वैज्ञानिक तकनीक है जिसके ज़रिए बादलों में कुछ रसायनों को छिड़क कर बारिश करवाई जाती है।

इसे वैज्ञानिक भाषा में क्लाउड सीडिंग (Cloud Seeding) यानी कृत्रिम वर्षा (Artificial Rain) भी कहा जाता है।

इसका उपयोग तब किया जाता है जब बादल तो आसमान में मौजूद हों लेकिन उनमें बारिश करवाने के लिए पर्याप्त नमी या “बारिश की बूँदें” बनने की क्षमता नहीं होती।

वैज्ञानिक कृत्रिम वर्षा कैसे करवाते हैं?

सबसे पहले वैज्ञानिक मौसम का अध्ययन करके ऐसे बादल चुनते हैं जिनमें थोड़ी बहुत नमी पहले से मौजूद हो 

इसके बाद वे हवाई जहाज, रॉकेट या ड्रोन को उन बादलों में भेजते हैं, और उनकी मदद से बदलो में सिल्वर आयोडाइड (Silver Iodide), सोडियम क्लोराइड (NaCl – साधारण नमक), या ड्राई आइस (Solid CO₂) जैसे रसायनो का छिडकाव करते हैं।

जब ये रसायन (Artificial Rain Chemical) बादलों में छिडके जाते हैं, तो बादलों में मौजूद जलवाष्प इनके चारों ओर जमने लगती है और छोटे-छोटे पानी के कण बनने लगते हैं।

धीरे-धीरे ये छोटे कण आपस में टकराकर बड़ी-बड़ी बूँदों में बदल जाते हैं।

जब बूँदें भारी हो जाती हैं तो वे ज़मीन पर गिरती हैं और बारिश होती है।

इसका उपयोग कहाँ होता है?

सूखा (Drought) प्रभावित क्षेत्रों में पानी लाने के लिए।

किसानों की फसल बचाने के लिए।

प्रदूषण और धूल कम करने के लिए (जैसे बीजिंग, चीन में)।

दुबई जैसे देशों में गर्म और शुष्क मौसम में बारिश बढ़ाने के लिए।

क्या यह हमारे लिए सही है?

कृत्रिम वर्षा के फायदे और नुकसान दोनों हैं।

फायदे:

  • सूखे इलाकों में पानी की कमी दूर हो सकती है।
  • खेती को सहारा मिलता है।
  • प्रदूषण और धूल के स्तर को कम किया जा सकता है।

 नुकसान:

  • सिल्वर आयोडाइड जैसे रसायन पर्यावरण और मिट्टी के लिए लंबे समय में हानिकारक हो सकते हैं।
  • यह तकनीक महंगी है और हमेशा सफल भी नहीं होती।
  • बहुत अधिक बारिश होने पर बाढ़ जैसी स्थिति भी बन सकती है।

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