क्या आपको या आपके किसी अपने को सांस लेने में दिक्कत होती है?
क्या अचानक सीने में जकड़न, खांसी या घरघराहट महसूस होती है?
अगर हां, तो हो सकता है कि यह **अस्थमा** की ओर इशारा हो।
आज हम जानेंगे कि अस्थमा क्या है, यह क्यों होता है और इससे कैसे बचा जा सकता है।
अस्थमा एक दीर्घकालिक (chronic) रोग है जो हमारी सांस की नलियों यानी *bronchial tubes* को प्रभावित करता है। अस्थमा में ये नलियाँ सूज जाती हैं, सिकुड़ जाती हैं और उनमें बलगम (mucus) भी जमा हो सकता है। इस वजह से सांस लेने में तकलीफ होती है।
लेकिन अस्थमा होता कैसे है?
अस्थमा के मरीजों की **सांस की नलियाँ (airways)** पहले से ही संवेदनशील (sensitive) होती हैं इसलिए immune system सामान्य चीजों पर भी ज़रूरत से ज़्यादा प्रतिक्रिया करती है।
तो जब कोई अस्थमा से पीड़ित व्यक्ति धूल, धुआं, ठंडी हवा, एक्सरसाइज या परागकण (pollen) जैसी चीजों के संपर्क में आता है, और हम इन्हें सांस के साथ अंदर लेते हैं, तो ये सीधे हमारी श्वसन नलियों (respiratory tract) तक पहुँच जाते हैं।
तो शरीर उन्हें एक खतरनाक चीज़ समझकर *एलर्जी प्रतिक्रिया* शुरू कर देता है।
इससे बलगम बनने लगता है और एयरवे की अंदरूनी परत में सूजन, इसके साथ ही मांसपेशियों का सिकुड़ना (bronchoconstriction) शुरू हो जाता है। जिससे हवा का रास्ता संकरा हो जाता है जिस कारण फेफड़ों में ऑक्सीजन जाना कम हो जाता है और व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत होती है।
इस वजह से मरीज को सांस लेने में तकलीफ होती है, सीने में जकड़न लगती है और सांस लेने पर आवाज़ आ सकती है – जिसे हम *wheezing* कहते हैं।
अस्थमा किस कारण होता है?
अस्थमा का कोई एक कारण नहीं होता – यह कई चीजों से ट्रिगर हो सकता है:”
- परागकण (Pollen)
- धूल-मिट्टी और धुआं (Pollution, Smoke)
- पालतू जानवरों की रूसी (Pet Dander)
- ठंडी हवा या मौसम में बदलाव
- एक्सरसाइज या भागदौड़
- मानसिक तनाव
- कुछ लोगों को दवाओं या खाने से भी एलर्जी हो सकती है
इन सबके संपर्क में आने से अस्थमा अटैक हो सकता है – जिसमें सांस लेना बहुत मुश्किल हो जाता है।
क्या अस्थमा का इलाज संभव है?
अगर अस्थमा का सही इलाज न किया जाए, तो यह खतरनाक अटैक भी दे सकता है, इसलिए समय रहते डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है।
अस्थमा पूरी तरह ठीक नहीं होता, लेकिन इसे दवाओं, इनहेलर और कुछ परहेज के ज़रिये कंट्रोल में रखा जा सकता है।
डॉक्टर आमतौर पर इनहेलर (Inhalers), ब्रॉन्कोडायलेटर (Bronchodilators) और स्टेरॉइड्स देते हैं।
इनहेलर का नियमित और सही इस्तेमाल बहुत जरूरी होता है।
बचाव कैसे करें?
- मौसम में पराग कण ज़्यादा हों, तो:
- बाहर कम निकलें
- मास्क पहनें
- घर लौटकर मुंह और हाथ धोएं
- ट्रिगर करने वाली चीज़ों से दूरी रखें और
- योग और प्राणायाम करें – खासकर *अनुलोम विलोम* और *कपालभाति
स्वस्थ जीवनशैली, एलर्जी से बचाव और नियमित दवा का सेवन अस्थमा को कंट्रोल करने में मदद करते हैं।”**
तो याद रखिए — अस्थमा जानलेवा नहीं, लेकिन लापरवाही जानलेवा हो सकती है!
समय पर पहचान, सही इलाज और सतर्कता से आप पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकते हैं।”
