कार्बनीकरण से कोयले का निर्माण कैसे होता है?

लाखों वर्षों पूर्व यह हमारी धरती थी। प्रचुर हरे भरे वनों से इसकी सतह ढकी हुई थी। विविध प्रकार के पशुओं तथा सुन्दर जल निकायों से विस्तृत।

बाढ़ग्रस्त वनों और दलदल क्षेत्रों में उगने वाले कई प्रकार के पौधे थे। जब ये पौधे मृत हो जाते थे तो पानी में गिर जाते थे परंतु इनका पूर्ण रूप से क्षय या नाश नहीं होता था क्योंकि जल के भीतर ऑक्सीजन की कमी होती है। यह अपूर्ण है मृदा नामक पदार्थ के निर्माण का कारण था।

कार्बनीकरण किसे कहते है

एक समय अवधि के अंतर्गत इस मृदा पदार्थ पर वातावरण और भौगोलिक घटनाओं के प्रभाव से बहुत सी परतें जमती रहीं।

अधिक तलछट में अर्थात नीचे मृदा पर अधिक दबाव जो मृदा को संपीडित करते गए।

जैसे-जैसे तलछटे जमती गई दबाव और ताप ज़मीन के नीचे बढ़ता गया।

इससे मृदा पर और उसके आसपास तापमान और दबाव बढ़ा। इसके परिणाम स्वरूप धीरे धीरे यह मृदा एक अन्य लिग्नाइट नामक पदार्थ याने मुलायम भूरा कोयला तथा तत्पश्चात दीर्घकाल में सक्त काले कोयले में बदल गया जिसमें कार्बन तत्व काफी अधिक प्रतिशत में था। रूपांतरण की इस प्रक्रिया को ही कार्बनिककरण कहते हैं।

 

  • इनके बारे मे सोचे ओर हमे बताएं-

कोयले को एक जीवाश्म इंधन क्यों कहा जाता है?

हमें कोयले का प्रयोग न्यायोचित क्यों करना चाहिए?

क्या कोयले को जलाने से वायु प्रदूषण होता है? क्यों?

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